क्या है मामला
उत्तर जिला के आदर्श नगर क्षेत्र के तहसीलदार भूपेंद्र अहलावत की सरकारी गाड़ी पर लाल और नीली बत्ती लगी मिली है। गाड़ी में हूटर भी लगा हुआ है। जबकि केंद्र सरकार के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद 2017 से ही लाल बत्ती का इस्तेमाल सिर्फ संवैधानिक पदों तक सीमित कर दिया गया है।
नियम क्या कहते हैं
- 1. लाल बत्ती: सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, CJI जैसी संवैधानिक पोस्ट पर ही लाल बत्ती ड्यूटी के समय लग सकती है। तहसीलदार इस श्रेणी में नहीं आते।
- 2. नीली बत्ती: ये सिर्फ एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस के आपातकालीन वाहनों के लिए है।
- 3. हूटर/सायरन: मोटर व्हीकल नियम 119(3) के तहत आम वाहनों में मल्टी-टोन हॉर्न या सायरन लगाना मना है। इसे ट्रैफिक क्लियर कराने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
"2013 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लाल बत्ती और सायरन 'लोकतंत्र के अपमानजनक प्रतीक' हैं। कोर्ट ने पूछा था, 'किस कानून के तहत कोई X कैटेगरी को सड़क पर पहले जाने का हक मिल जाता है?'।"
अब क्या होगा
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 209(a) के तहत ऐसे उल्लंघन पर 2000 रुपये तक का चालान हो सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पहले भी निजी गाड़ियों पर बत्ती और हूटर लगाने वालों के खिलाफ अभियान चलाया है।